‹मैं उनसे दृष्टान्तों में इसलिए बातें करता हूँ, कि वे देखते हुए नहीं देखते; और सुनते हुए नहीं सुनते; और नहीं समझते।› ‹और उनके विषय में यशायाह की यह भविष्यद्वाणी पूरी होती है:› ‹‘तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं;› ‹और आँखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा।› ‹क्योंकि इन लोगों के मन सुस्त हो गए है,› ‹और वे कानों से ऊँचा सुनते हैं › ‹और उन्होंने अपनी आँखें मूँद लीं हैं;› ‹कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें,› ‹और कानों से सुनें और मन से समझें,› ‹और फिर जाएँ, और मैं उन्हें चंगा करूँ।’› ‹“पर धन्य है तुम्हारी आँखें, कि वे देखती हैं; और तुम्हारे कान, कि वे सुनते हैं।› ‹क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं और धर्मियों ने चाहा कि जो बातें तुम देखते हो, देखें पर न देखीं; और जो बातें तुम सुनते हो, सुनें, पर न सुनीं।› ‹“अब तुम बोनेवाले का दृष्टान्त सुनो› ‹जो कोई राज्य का› ‹वचन›‹सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था।› ‹और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है।› ‹पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन रह पाता है, और जब वचन के कारण क्लेश या उत्पीड़न होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है।› ‹जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता।› ‹जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।”›